राहुल गांधी और अमित शाह में क्या फर्क है, एक दिन में समझ आ गया
गुजरात में इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं और कमान खुद अमित शाह ने संभाल ली है। उन्होंने बूथ के स्तर पर जाकर प्रचार शुरू कर दिया है।
गुजरात में इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं और कमान खुद अमित शाह ने संभाल ली है। उन्होंने बूथ के स्तर पर जाकर प्रचार शुरू कर दिया है।
गुजरात चुनाव में अमित शाह गांव-गांव घूम रहे हैं और राहुल गांधी घर का झगड़ा सुलझा रहे हैं। एक ही दिन में दो बातें हुई। अमित शाह गुजरात के छोटा उदयपुर के आदिवासी गांव देवलिया में थे। आदिवासी किसान के घर ज़मीन पर बैठकर अमित शाह ने खाना खाया और कांग्रेस को हर बूथ पर हराने का नारा दिया।
गुजरात में इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं और कमान खुद अमित शाह ने संभाल ली है। उन्होंने बूथ के स्तर पर जाकर प्रचार शुरू कर दिया है। देवलिया आदिवासी बहुल इलाका है और ये सीट नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए भी बीजेपी नहीं जीत पाई। पिछले 40 साल से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। जब अमित शाह आदिवासी के घर ज़मीन पर बैठकर खाना खा रहे थे, उस वक्त राहुल गांधी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला को दिल्ली में मना रहे थे। राहुल से मिलने के बाद भी वाघेला नहीं माने। उन्होंने सीएम उम्मीदवार घोषित करने की मांग छोड़ दी है, लेकिन अपने खास लोगों के लिए टिकट मांगा है। राहुल से मिलने के बाद बघेला ने अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने कहा, अभी कांग्रेस में हूं। कल किसने देखा है।
इस एक दिन में ही राहुल गांधी को अमित शाह के काम करने के तरीके से बहुत कुछ सीखना चाहिए। अमित शाह ज़मीन पर पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं और राहुल अभी पार्टी को तोड़ फोड़ से बचाने में ही लगे हैं।



