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बिहार बीमार है क्योंकि 14 साल से नीतीश कुमार है!

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माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी,
नमस्कार

उम्मीद है की आप स्वस्थ होंगे और बिहार के कई प्रांत में महामारी के तरह फैले चमकी बुखार की रोकथाम के लिए व्यस्त होंगे। आपको पता ही होगा की बिहार में चमकी बुखार से जहां 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है तो वहीं लू से 75 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का पहला मामला 2010 में आपके मुख्यमंत्री होते हुए प्रकाश में आया था लेकिन लगभग एक दशक बाद भी आपकी लोकप्रिय सरकार को इस बीमारी का मूल कारण का पता नहीं है। लंबे समय से चमकी बीमारी से राज्य की जनता को मुक्ति दिला पाने की जिम्मेदारी क्या आपकी  नहीं है? राज्य के मुखिया आप हैं तो जिम्मेदारी आपकी ही बनती है और सवाल भी आप से ही किया जाएगा। लेकिन आपको अपने पद का अहंकार इतना है कि आपसे जब भी इस विषय पर बात करने की कोशिश की गई तो आप ‘मौनमंत्री’ बन गए। 2014 के आम चुनाव से आपको सबक लेना चाहिए , जनता को अब ‘मौन’ मुद्रा में रहने वाले राजनेता पसंद नहीं है। लगभग एक दशक से हर साल गर्मी में बच्चों को अपना शिकार बनाने वाली ‘चमकी’ ने आपके शासन की चमक फींकी ही नहीं की बल्कि सरकार के कामकाज के तरीके और उसकी दूरदृष्टि पर भी बड़े सवाल भी उठाए है। बिहारियों को अब ‘सुशासन कुमार’ को अपना मुख्यमंत्री कहते हुए शर्म आती है।

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव  में आपकी की पार्टी जेडीयू ने स्‍लोगन दिया था,बिहार में बहार हो  नीतीश कुमार हो ।“ सरकार के 4 साल हो गए है और इन 4 सालों में  सरकार के प्रदर्शन को देख कर लगता है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू को अपना स्लोगन बदल कर “ बिहार बीमार  है क्योंकि 15 साल से नितीश कुमार हैं”कर लेना चाहिए। एक दशक पहले जो बीमारी दस्तक दी हो और हर साल उससे मासूमों की जान जा रही हो और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हो। क्या सरकार के पास ऐसे आंकड़े उपलब्ध नहीं रहते हैं कि किस सीजन में किस तरह की बीमारी का प्रकोप बढ़ता है और उसके लिए पहले से क्या इंतजाम किए जाने चाहिए? बिहार में डॉक्टरों की भारी किल्लत है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यहाँ 28391 की आबादी पर महज एक सरकारी डाक्टर है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैमाने के अनुसार यह आंकड़ा प्रति 1000 पर एक डॉक्टर होना चाहिए।

आप 2010 में सूबे के मुख्यमंत्री थे लेकिन शायद देश के प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा के चक्कर में आपके पास 2014 तक चमकी बुखार की तरफ ध्यान देने का समय मिला नहीं होगा। इसमें कुछ गलत भी नहीं है बड़े सपने और महत्वाकांक्षाओं के सामने छोटे बच्चों की बलि दी ही जा सकती है। कहीं मरे हुए बच्चों के माँ-बाप और परिजन की आह तो नहीं थी जिसने दिल्ली की गद्दी पर बैठने के सपने पाले आपको अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपने घोर विरोधी लालू याद के साथ जाने के लिए मजबूर कर दिया। शायद आपकी किस्मत में और फजियत लिखी हुई थी इसलिए जिस भाजपा को सांप्रदायिक ताकत बोल कर आप उनसे अलग हुए, फिर से मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उसी बीजेपी के गोद में जा कर बैठ गए। नरेंद्र मोदी ने आपकी अब क्या हालत बना रखी है उससे मुझे आपसे काफी संबेदना है। जिस JDU के पास एक समय रेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण बिभाग की जिम्मेदारी थी आज 2019 के मोदी सरकार में उसे सिर्फ 1 कैबिनेट मंत्री का प्रस्ताव दिया गया। आपकी आज की परिस्थिति मुझे ‘ना घर के ना घाट के’ मुहाबरे की याद दिलाता है। आपने जो समय अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लगाया अगर उसे बिहार की प्रगति के लिए लगाया होता तो आज आपकी महत्वाकांक्षा भी पूरी होती और बिहार देश के अब्बल राज्यों में से एक होता। आज देश-विदेश के मीडिया के सामने जो बिहार की जग-हंसाई हो रही है, उससे बचा जा सकता था।

आपकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है की  आप अपने सरकार के काम की तुलना लालू-राबड़ी शासनकाल से करते हुए आंकड़े पेश करते है और खुद की पीठ थपथपाते रहते है और RJD से प्रश्न करना शुरू देते है कि वो बताएं उनके समय में क्या हालत थी। हालांकि करीब 15 साल से बीजेपी-जदयू की सरकार है बिहार में। आपकों यह समझना बहुत जरूरी है कि 3 दशक पहले से बिहार की तुलना कर आप खुद अपनी किरकिरी करवा रहे है। लालू राबड़ी देवी के समय के हालात से उबरने के लिए ही जनता ने आपको चुना है।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था ही नहीं शिक्षा व्यवस्था पर भी आए दिन सवाल उठते रहते है। साल 2016 की बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा की आर्ट्स टॉपर रूबी राय ने बिहार बोर्ड में लगे भ्रष्‍टाचार की पोल खोल दी थी।बिहार में जब भी बेरोजगारी की बात पर आपकी सरकार को घेरा जाता है तो हर बार आप बेरोजगारी को राज्य की समस्या नहीं देश की समस्या बता कर कन्नी काट लेते है। ज्यादा पूछने पर लालू -राबड़ी राज्य के समय के आकड़े से तुलना कर देते है और बिहार में रोजगार के अवसर नहीं मिलने में बिहार की भौगोलिक स्थिति को दोष देते है। लालू -राबड़ी राज्य के समय के आंकड़े से तुलना करना तो आपकी यूसपी है।

आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए , हर जगह बिहारियों को उनके मेहनत और प्रतिभा की वजह से इज्ज़त मिलती है लेकिन यह बिहारियों का  दुर्भाग्य  है कि सम्राट अशोक की धरती पर दशको से कोई अच्छा शासक नहीं मिला। हर बिहारी वोट देने से पहले यहीं सोचता है अगर नितीश कुमार नही तो कौन ? इस सवाल के रूप में 10वीं भी पास नहीं तेजस्वी यादव और सिर्फ विपक्ष में रहते हुए अपने बडबोलेपन के लिए प्रसिद्ध सुशील मोदी ही दिखते है। शायद यह आपकी सबसे बड़ी खुशनसीबी है।

हर बार की तरह गर्मी कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी और चमकी बुखार का प्रकोप भी। अगले साल फिर से ऐसा होगा और कई मासूम बच्चें काल के ग्रास बन जायेंगे और यह सिलसिला चलता रहेगा।

अंत में यही कहूंगा कि आप स्वस्थ रहें और भगवान बिहार एवम बिहारियों का भला करे क्योंकि बिहार और देश के राजनेता तो उनका भला करने से रहे।

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