पांडू पुत्र नकुल की कलयुग यात्रा

Nakul's Journey to Hastinapur in Kalyug पाठकों की तरफ से 

हजारों वर्ष हो गए परन्तु हस्तिनापुर की यादें अभी भी हमारी जहन में है । दुर्योधन भैया आज भी द्रौपदी से आँखे नही मिला पाते हैं और शकुनी मामा तो हमारे साथ कोई भी खेल खेलने से कतराते है। भ्राता कर्ण आज भी अपने दिए हुए वचन पे कायम रहते…

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