ट्रंप करेंगे ऑपरेशन, अलकायदा चीफ अलज़वाहिरी पाकिस्तान में ही मिलेगा
अप्रैल के पहले हफ्ते में अलज़वाहिरी को कराची से भगा दिया गया। लेकिन अलज़वाहिरी अभी पाकिस्तान में ही है, ये बात पक्की है।
अप्रैल के पहले हफ्ते में अलज़वाहिरी को कराची से भगा दिया गया। लेकिन अलज़वाहिरी अभी पाकिस्तान में ही है, ये बात पक्की है।
अलकायदा का मुखिया अयमान अल-ज़वाहिरी पाकिस्तान में ही छिपा था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसे पनाह दी थी । जैसे आईएसआई ने ओबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को छिपाया था, उसी तरह ओसामा के बाद अलकायदा चीफ बने अलज़वाहिरी को भी दुनिया की नज़र से दूर रखा गया। कराची के एक छोटे से घर में अयमान अलज़वाहिरी करीब दो साल तक छिपा बैठा था।
प्रतिष्ठित मैगजीन न्यूज़वीक की रिपोर्ट ने खुलासा किया था की अलज़वाहिरी पाकिस्तान के कराची शहर में छिपा है। लेकिन पाकिस्तान में मौजूद सूत्रों ने बताया कि अलजवाहिरी अब कराची से गायब हो गया है। खबर छपने से पहले ही आईएसआई को भनक लग गई थी कि अलज़वाहिरी का अड्डा लीक हो चुका है। अप्रैल के पहले हफ्ते में अलज़वाहिरी को कराची से भगा दिया गया। लेकिन अलज़वाहिरी अभी पाकिस्तान में ही है, ये बात पक्की है। पाकिस्तान में मौजूद एक विश्वस्त सूत्र के मुताबिक आईएसआई ने इस बार अलज़वाहिरी को कराची से निकालकर दूसरे बड़े शहर में छिपाया है। इस बार भी उसे रिहायशी इलाके में ही रखा गया है। कराची सिंध सूबे की राजधानी है और पाकिस्तान की सबसे घनी आबादी वाला शहर है। इसलिए अलज़वाहिरी को आम लोगों के बीच छिपाकर रखा गया था। लेकिन अब भी वो कराची से बहुत दूर नहीं गया है।
खबर मिली है कि इस वक्त भी वो सिंध सूबे के ग्रामीण इलाके में मौजूद है, जहां से आईएसआई उसे पेशावर की तरफ ले जाने की कोशिश कर रही है। दो मई 2011 को अमेरिका ने सील कमांडो भेजकर ओसामा बिन लादेन को मार डाला था। आईएसआई ने ओसामा को इस्लामाबाद के पास ही ओबटाबाद में पनाह दी थी। लेकिन इस तरह कमांडो भेजकर कराची जैसे शहर में हमला करना बेहद मुश्किल है। आस-पास लोगों की इतनी ज़बरदस्त भीड़ होती है कि कमांडो ऑपरेशन हो ही नहीं सकता। इसलिए आईएसआई ने इस बार अलज़वाहिरी के लिए सुख सुविधा वाली जगह नहीं एक महफूज़ जगह ढूंढी है। जहां वो एक छोटे से घर में छिपकर रहता है। अलज़वाहिरी को मारना बेहद मुश्किल है इस बात का अंदाज़ा एक घटना से लगाया जा सकता है।
न्यूज़वीक पत्रिका के मुताबिक 2016 के जनवरी महीने में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को अयमान अल-ज़वाहिरी के अड्डे की पक्की खबर लग चुकी थी। अलज़वाहिरी को मारने के लिए अमेरिका ने ड्रोन से हमला किया, लेकिन हमले से ठीक पहले अलज़वाहिरी ने अपने सोने की जगह बदल ली। वो जहां बैठा था वहां से सिर्फ दस मिनट पहले वो चला गया था। दस मिनट पहले अगर ड्रोन गिरता तो अलज़वाहिरी मारा जाता। अलज़वाहिरी के सभी बॉडीगार्ड मारे गए। हमले में वो मकान गिरा, जिसके पास अलज़वाहिरी सो रहा था। वो मलबे में फंस गया, उसकी आंख पर मौजूद चश्मा टूट गया। लेकिन अलज़वाहिरी की जान बच गई। अफगानिस्तान में मौजूद तालिबान के नेताओं ने न्यूज़वीक पत्रिका को बताया कि अब अलज़वाहिरी वापस अफगानिस्तान नहीं आ सकता। अफगानिस्तान आया तो वो पक्का मारा जाएगा। इसलिए उसके पास अब सिर्फ एक महफूज जगह है-पाकिस्तान। तालिबान के लोग बताते हैं कि अलज़वाहिरी को ‘ब्लैक लेग’ उठाकर ले गए। ‘ब्लैक लेग’ यानि ‘काले पैर’ तालिबान में आईएसआई का यही कोडवर्ड है।



