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तीन तलाक बिल लोकसभा में पास,जानिए बिल की खास बातें

अब इस बिल को राज्यसभा में भेजा जाएगा जहाँ पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण बिल को पास कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

Triple talaq bill passed in Lok Sabha Breaking News आज की रिपोर्ट बड़ी ख़बरें समाचार 

अब इस बिल को राज्यसभा में भेजा जाएगा जहाँ पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण बिल को पास कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

आज लोकसभा में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण बिल, 2017 पास हो गया है । ये बिल बिना किसी संशोधन के उसी प्रारूप में पास हुआ जिसमें सरकार ने इसे पेश किया था । अब इस बिल को राज्यसभा में भेजा जाएगा जहाँ पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण बिल को पास कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। राज्यसभा से पास होने के बाद बिल को संसद की मंजूरी मिल जाएगी और उसे राष्‍ट्रपति की मुहर के लिए भेजा जाएगा । राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक देश में कानून के तौर पर लागू हो जाएगा।

कांग्रेस ने बिल में खामियों का उल्‍लेख करते हुए स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया। कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब बिल के समर्थन में हैं, लेकिन कमियों को भी दूर किया जाना भी जरूरी है। विधेयक पर विपक्षी सदस्य 19 संशोधन प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन सदन ने सभी को ख़ारिज कर दिया । सरकार की ओर से पेश बिल पर एमआईएमआई अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तीन संसोधन की मांग रखी थी, जो वोटिंग के दौरान औंधे मुंह गिर गया । ओवैसी के पहले  और दूसरे संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में दो वोट पड़ा । वहीं उनके तीसरे संशोधन को केवल एक वोट मिला ।

तीन तलाक बिल की खास बातें :

  1. यह बिल सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ तीन तलाक पर ही लागू होगा। 
  2. किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा।
  3. इसके तहत पीड़िता अपने व अपने नाबालिग बच्चों के लिए संरक्षण व गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। इस मामले पर मजिस्‍ट्रेट अंतिम फैसला करेंगे।
  4. ट्रिपल तलाक गैरजमानती अपराध होगा। यानी पति अगर पत्नी को ट्रिपल तलाक देता है तो उसे तीन साल तक की सजा होगी और इस दौरान उसे जमानत भी नहीं मिलेगी।
  5. प्रस्तावित कानूनजम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।

 

गौरतलब है कि 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा पर रोक लगाई थी और सरकार से तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने को भी कहा था ।

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