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2जी स्पेक्ट्रम घोटाला फैसला: आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़े घोटाले के सभी आरोपित बरी

1.76 लाख करोड़ रुपये के 2जी घोटाले  में पटियाला हाउस कोर्ट की सीबीआई विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोई समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि,  इस मामले में सीबीआई कोर्ट में सबूत पेश करने में नाकाम रही जिसके चलते सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी किया जाता है । सीबीआई ने कहा है कि वो इस मामले में फैसले की कॉपी मिल जाने के बाद कानूनी उपायों पर विचार करेगी। उम्मीद है की सीबीआइ इस फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देगी। 2 जी स्कैम को आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है और ऐसे घोटाले में सीबीआई की नाकामी उनके कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल तो बिल्कुल उठाती है ।

अदालत का फैसला आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा  कि,” आज मेरी बात सिद्घ हो गई है कि कोई करप्‍शन और कोई घाटा नहीं था। अगर घोटाला है तो झूठ का घोटाला है। विपक्ष और विनोद राय को देश के सामने माफी मांगनी चाहिए ।

सीबीआई ने अप्रैल 2011 में इस पूरे मामले में अदालत में करीब 80000 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी इस चार्जशीट में 125 गवाहों और 654 दस्तावेजों का जिक्र किया गया था। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि 2जी मामले में 122 लोगों को गलत तरह से लाइसेंस जारी किए गए थे, जिसकी वजह से सरकार को 30984 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 में यह सभी लाइसेंस रद्द कर दिए थे। सीबीआई द्वारा दायर किए गए इस मामले ने कोर्ट ने 17 आरोपियों के चार्ज तय किए थे।

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?

2010 में महालेखाकार और नियंत्रक यानी सीएजी की रिपोर्ट में 2008 में आवंटित किए गए 2जी स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर इसे बांटा गया था। इस वजह से एक लाख 76 हज़ार करोड़ का नुक़सान हुआ था। कैग का कहना था कि नीलामी के जरिए यदि यह स्‍पेक्‍ट्रम आवंटित किए जाते तो यह रकम सरकारी खजाने में जाती। सीबीआई की चार्जशीट में 30 हजार करोड़ के नुकसान की बात रखी गई थी।

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