आपकी नींद कम करने वाला है रेलवे का नया नियम
रेलवे ने सर्कुलर जारी कर ट्रेन में यात्रा के दौरान सोने का नियम बदल दिया है।रेलवे ने नियम में बदलाव करते हुए यह तय किया है कि आरक्षित कोचों में सोने की सुविधा रात में 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक होगी और बाकी बचे समय में दूसरे आरक्षित यात्री इस सीट पर बैठ सकते हैं।आपको बता दें कि इससे पहले सोने का आधिकारिक समय रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक था। इस नियम से लोअर बर्थ, मिडिल बर्थ और साइड लोअर पर यात्रा करने वाले व्यक्ति प्रभावित होंगे।उन्हें अब ट्रेन में सोने के लिए 1 घंटे का कम समय मिलेगा। हालांकि, अगर आप अपर बर्थ या साइड अपर बर्थ के यात्री हैं तो आप जब चाहें बैठें और जब चाहें सो जाएं। इस नए प्रावधान ने भारतीय रेलवे वाणिज्यिक नियमावली, खंड एक के पैराग्राफ 652 को हटा दिया है। इससे पहले इस प्रावधान के अनुसार यात्री रात के नौ बजे से लेकर सुबह छह बजे तक सो सकते थे।
1 सितंबर से लागू इस नए नियम के अनुसार शताब्दी और सीटिंग कोच वाली ट्रेन को छोड़कर के सभी तरह के स्लीपर और एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू टियर व थ्री टियर कोच में रात के समय यात्रा कर रहे यात्री केवल 10 बजे से लेकर के सुबह 6 बजे तक सो सकेंगे।
31 अगस्त को जारी सर्कुलर में हालांकि कुछ निश्चित यात्रियों को छूट दी गई है। रेलवे ने कहा है कि अगर कोई गर्भवती, दिव्यांग या फिर कोई बीमार यात्री हो तो उसे सहयात्री जल्दी सोने की सुविधा दें। दरअसल, गर्भवती, दिव्यांग या फिर बीमार व्यक्ति को अपर बर्थ पर जाने में दिक्कत होती है और उसे लोअर बर्थ पर यात्रा करने में आराम रहता है।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि ट्रेन में सोने को लेकर यात्रियों के फीडबैक को देखते हुए इसमें बदलाव किया गया है।
