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‘मुगलसराय’ का नाम सुनकर नेता झगड़ा क्यों करते हैं?

उत्तर प्रदेश का एक रेलवे स्टेशन सियासत का अखाड़ा बन गया है। संसद से लेकर सड़क और स्टेशन तक इसके नाम पर घमासान हो रहा है ।मुगलसराय स्टेशन का नाम उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग जरूर जानते होंगे। योगी आदित्यनाथ की सरकार इस स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन रखना चाहती है। विपक्ष का कहना है मुगलसराय ऐतिहासिक नाम है, इसलिए इसे बदलना नहीं चाहिए। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर दीन दयाल स्टेशन रखने का फैसला कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी है। नियम के मुताबिक किसी स्टेशन या शहर का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से इजाजत लेनी पड़ती है।

उत्तर प्रदेश की सरकार ने मुगलसराय के बड़े चौराहे पर दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा लगाने और उस चौराहे का नाम दीनदयाल चौक करने का फैसला भी कर लिया है। जब राज्यसभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने मुद्दा उठाया तो  केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने जबाव दिया। नकवी ने कहा विपक्ष को मुगलों का नाम तो पसंद है, लेकिन एक राष्ट्रवादी दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ऐतराज है।

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