रायसीना में रामनाथ युग शुरू, 21 तोपों की सलामी मिली
राष्ट्रपति भवन से प्रणब मुखर्जी की विदाई हुई और रामनाथ कोविंद ने भारत के 14वें राष्ट्रपति तौर पर शपथ ली। भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कोविंद को शपथ दिलाई। भव्य समारोह में कोविंद को 21 तोपों की सलामी दी गई और परंपरागत बग्घी में उन्होंने सवारी की। संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ के बाद भारत माता की जय और ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगे।
शपथ के बाद कोविंद ने कहा, “मैं मिट्टी के घर में पला-बढ़ा हूं। हमारे देश की भी यही गाथा रही है। मैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. राधाकृण्ष्णन, डॉ. कलाम और प्रणब मुखर्जी जिन्हें हम प्रणब दा कहते हैं, उनके पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूं।” इसके बाद नए राष्ट्रपति ने नए मिशन की बात की। उन्होंने कहा, “हम इक्कसीवीं सदी के दूसरे दशक में हैं। हमें भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी।




हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे।” ये कैसे होगा, इस पर भी राष्ट्रपति कोविंद ने प्रकाश डाला, उन्होंने देश की सवा सौ करोड़ जनता से कहा, “राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारों द्वारा नहीं किया जा सकता। सरकार सहायक हो सकती है। वह समाज के उद्यमियों को नई दिशा दिखा सकती है। राष्ट्रीय गौरव ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। हमें भारत की मिट्टी और पानी पर गर्व है। हमें भारत की संस्कृति-परंपरा-अध्यात्म पर गर्व है। हमें गर्व है अपने कर्तव्यों के निवर्हन पर। देश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माता है। प्रत्येक भारतीय मूल्यों का संरक्षक है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सशस्त्र बल राष्ट्र निर्माता है। पुलिस और अर्द्धसैनिक बल जो आतंकवाद से लड़ रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता है। जो किसान तपती धूप में अन्न उगा रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। खेत में न जाने कितनी महिलाएं भी काम करती हैं। जो भारत को मंगल तक ले जा रहा है, या किसी वैक्सीन का आविष्कार कर रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। जिस नौजवान ने अपना स्टार्टअप शुरू किया है और खुद रोजगारदाता बन गया है, वो राष्ट्र निर्माता है।”



