जहां मुगल बादशाह को मिली शरण वहां मोदी ने बनाया ‘इज्जत घर’
पीएम ने अपने वाराणसी दौरे के आखिरी दिन शहंशाहपुर गांव में एक स्वच्छता संबंधी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और गड्ढा खोदकर शौचालय की नींव रखी।
पीएम ने अपने वाराणसी दौरे के आखिरी दिन शहंशाहपुर गांव में एक स्वच्छता संबंधी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और गड्ढा खोदकर शौचालय की नींव रखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहंशाहपुर गांव में अपने हाथों से पहली बार शौचालय की नींव रखी। मोदी ने कहा, ”यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि अगर घर में टॉयलेट है तो बीमारी पर खर्च होने वाला सालाना 50 हजार रुपए बच जाता है। मुझे यहां एक गांव के लोगों ने कहा है कि 2 अक्टूबर के बाद कोई भी शख्स बाहर शौच के लिए नहीं जाएगा। आज मैं जिस गांव में गया, वहां शौचालय में लिखा हुआ है- इज्जत घर। ये हमारी महिलाओं की इज्जत के लिए ही है। जो महिलाओं की इज्जत चाहेगा, वो शौचालय जरूर बनाएगा।”
As a part of #SwachhataHiSeva movement, did Shramdan for the construction of a twin pit toilet at Shahanshahpur, Varanasi. pic.twitter.com/53WDxYL7nq
— Narendra Modi (@narendramodi) September 23, 2017
ये वो गांव है जहां साढ़े चार सौ साल पहले मुगल बादशाह हुमायूं रुके थे इसी वजह से इस गांव का नाम शहंशाहपुर पड़ा था। शहंशाहपुर ने एक बार फिर शोहरत पाई और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की। 450 साल पहले शेरशाह सूरी से युद्ध हारने के बाद शहंशाह से गरीब बना हुमायूं अपनी जान बचाने के लिए छिपने की जगह ढूंढ रहा थे। उस वक्त शहंशाहपुर की एक महिला ने अपनी झोपड़ी में उसे शरण दी थी।
मोदी ने इस गांव में पशु आरोग्य मेला का उद्घाटन भी किया और कहा कि जानवर वोट नहीं देते इसलिए दूसरी पार्टी जानवर का ध्यान नहीं रखती।
Visited a Pashudhan Arogya Mela on Day 2 of my Kashi visit. UP Government’s focus on animal welfare is commendable & will help farmers. pic.twitter.com/R429RL8y0s
— Narendra Modi (@narendramodi) September 23, 2017



