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सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले मेजर बोले, गोलियां कान के बगल से निकल रही थी

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक का एक साल होने वाला है। इस सर्जिकल स्ट्राइक का नेतृत्व करने वाले मेजर ने नई किताब में ऑपरेशन का पूरा ब्यौरा दिया है। इसमें सर्जिकल स्ट्राइक की 14 कहानियों को शामिल किया गया है, जो भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और पराक्रम के बारे में बताती हैं।मेजर के मुताबिक गोलीबारी शुरू और खत्म होने में महज 1 घंटे का समय लगा। लेकिन आंतकवादियों कें कैंप खत्म करने के बाद वापस सही सलामत लौटना सबसे मुश्किल था। गोलियां कान के बगल से निकल रही थी। अगर मैं एक फीट भी ज्यादा लंबा होता तो मेरे सिर में कई गोलियां लगती।

किताब का नाम ‘इंडियाज़ मोस्ट फीयरलेस: ट्रू स्टोरीज़ ऑफ मॉडर्न मिलिट्री हीरोज़’ है। किताब में मेजर का नाम माइक टैंगो बताया गया है जो अफसर का असली नाम नहीं कोडवर्ड है। सर्जिकल स्ट्राइक के ऑपरेशन के लिए आर्मी ने खास तौर से उरी अटैक के ही जवानों को चुना था। किताब में कहा गया है, ‘‘रणनीतिक रूप से यह चालाकी से उठाया गया कदम था, वहां की जमीनी हालात की जानकारी उनसे बेहतर शायद ही किसी को थी। उसमें साथ ही कहा गया है, ‘‘उनको मिशन में शामिल करने का मकसद उरी हमलों के दोषियों के खात्मे की शुरुआत भी था “।18 सितंबर को उरी के आर्मी बेस पर आतंकी हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। इन जवानों में जोश था और दिल में बदले की आग धधक रही थी।

किताब में कहा गया है, ‘टीम लीडर के रूप में मेजर टैंगो ने खुद से सभी अधिकारियों और कर्मियों का चयन किया। उन्हें इस बात की अच्छी तरीके से जानकारी थी कि 19 लोगों की जान बहुत हद तक उनके हाथों में थी।’ मेजर के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक के लिए आईएसआई द्वारा संचालित और पाकिस्तानी सेना से संरक्षित प्राप्त आंतकियों के 4 लॉन्चिंग पैड्स को चुना गया था।चारों टारगेट मिलाकर करीब 38-40 आतंकी और 2 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।

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