पनामा में गई नवाज़ की कुर्सी, कोर्ट ने कहा, नहीं हैं शरीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की फिर कुर्सी चली गई और इस बार कुर्सी आर्मी ने नहीं सुप्रीम कोर्ट ने खींची है। पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ को दोषी करार दिया है। जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच ने शरीफ और उनके बेटे-बेटी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो को 6 हफ्तों के अंदर इस केस को निपटाना है, मतलब नवाज़ शरीफ कुर्सी से तो हटे ही अब जेल भी जा सकते हैं। पांच जजों की बेंच में जस्टिस आसिफ सईद खोसा, जस्टिस एजाज अफजल खान, जस्टिस गुलजार अहमद, जस्टिस शेख अजमद सईद और जस्टिस इजाजुल अहसान शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के कमरा नंबर एक में नवाज़ शरीफ को दोषी करार देने का फैसला सुनाया गया। अब शरीफ के सामने सिर्फ दो रास्ते बचे हैं, पहला अपने भाई शाहबाज़ शरीफ को प्रधानमंत्री बनाएं। लेकिन शाहबाज़ पाकिस्तान की संसद (जिसे वहां नेशनल एसेंबली कहा जाता है) के सदस्य नहीं हैं, इसलिए 45 दिन तक नवाज़ सरकार में रक्षा मंत्री रहे ख्वाजा आसिफ केयरटेकर प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।
नवाज़ की कुर्सी क्यों गई?
नवाज़ 1990 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। इस दौरान नवाज़ के परिवार ने लंदन में जायदाद खरीदे।आरोप लगा कि लंदन में शरीफ परिवार के पास 4 अपार्टमेंट हैं। नवाज शरीफ के दो बेटे हैं। हुसैन और हसन के अलावा नवाज़ की बेटी मरियम भी फंस गई हैं। आरोप है कि नवाज ने टैक्स हैवन कहे जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में चार कंपनियां शुरू की और इन कंपनियों के जरिए लंदन में छह जायदाद खरीदे। बाद में शरीफ परिवार ने इसी जायदाद को गिरवी रखा और 70 करोड़ रुपए का कर्ज ले लिया। कोर्ट में नवाज़ और उनका परिवार ये नहीं बताया कि इतनी जायदाद खरीदने के लिए रकम कहां से आई?
