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स्वर्ण मंदिर में ‘खालिस्तान ज़िदाबाद’ के नारे का सच क्या है?

'khalistan' zindabad slogans raised in golden temple आज की रिपोर्ट पंजाब की बड़ी ख़बरें 
33 साल पहले पंजाब में ऑपरेशन ब्लूस्टार खत्म हुआ। लेकिन हर 6 जून को ऐसी तस्वीरें खबर बनती है जो ‘खालिस्तान’ की याद दिलाती है। एक बार फिर 6 जून को स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे गूंजे। कुछ लोग तलवार लहराते नज़र आए। अब इस घटना के पीछे कौन हैं, इसे भी जानने की ज़रूरत है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह है। उन्हें संदेश पढ़ने से रोकने के लिए ही ये नारेबाजी की गई। पुलिस को इसका अंदेशा पहले से था, इसलिए पंजाब पुलिस ने पूरी तैयारी की थी। ये झगड़ा अकाल तख्त की सियासत से जुड़ा है। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के विरोधी शिरोमणी अकाली दल-ए के नेता सिमरनजीत सिंह हैं। सिमरनजीत सिंह के इशारे पर ही उनके समर्थकों ने खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए। इसलिए इन नारों से घबराने या डरने की ज़रूरत नहीं है। ये पंजाब में सियासत करने वाले कुछ लोगों की कोशिश थी, जिसके पीछे कोई बड़ी साजिश फिलहाल नहीं है।
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